परिवार से ही हमारे भीतर सद्गुणों का विकास होता है। व्यक्ति के विकास में उसके परिवार का बहुत बड़ा योगदान होता है। बच्चे पर प्रथम प्रभाव परिवार के माहौल का ही पड़ता है। यदि पारिवारिक माहौल अच्छा है तो वह तेजी के साथ मानसिक रूप से सबल होने लगता है।
परिवार हमारी शक्ति और आंतरिक ऊर्जा का केंद्र है। इसके बल पर ही हम सामाजिक जीवन का सर्वोच्च प्राप्त कर सकते हैं। यह संस्कृति एवं जीवन मूल्यों की प्राथमिक पाठशाला भी है। परिवार से ही हमारे भीतर सद्गुणों का विकास होता है। किसी भी व्यक्ति के विकास में उसके परिवार का बहुत बड़ा योगदान होता है।बच्चे पर प्रथम प्रभाव परिवार के माहौल का ही पड़ता है। यदि पारिवारिक माहौल अच्छा है तो वह तेजी के साथ मानसिक रूप से सबल होने लगता है। उसकी बौद्धिक एवं आध्यात्मिक क्षमता में सकारात्मक परिवर्तन देखा जा सकता है। इसके विपरीत यदि परिवार का माहौल ठीक न हो तो बच्चा टूटने लगता है। उसका विकास अवरुद्ध होने लगता है। वह मानसिक एवं बौद्धिक रूप से कमजोर होने लगता है। उसके स्वभाव में नकारात्मकता आने लगती है। वह उद्विग्न रहने लगता है। कभी-कभी वह हिंसक भी हो जाता है।


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