
तितली आसन को करने से पहले अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा करके बैठें और पैर सीधे बाहर की ओर फैलाएं।अब पैरों को मोड़कर हाथों की उंगलियों को पैरों के पंजों के ऊपर लाकर आपस में मिला दें। इस दौरान आपकी एडियां शरीर से सटी हुई होनी चाहिए! सामान्य रूप से सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ ऊपर ले जाएं और फिर नीचे लाएं। आपको ऐसा 15 से 20 बार करना है।
तितली आसन के लाभ। 1.तनाव दूर करता है! 2.तितली आसन पाचन स्वास्थ्य में सुधार करता है! 3.तितली आसन जांघ के फैट को कम करता है! 4.यह पैरों को मजबूत करता है! 5.इससे पीठ दर्द में लाभ मिलता है।
सावधानियां। 1.अगर कोई व्यक्ति घुटने या टखने की समस्या से परेशान है, तो उस व्यक्ति को तितली आसन का अभ्यास करने से बचना चाहिए! 2.अगर आपको तितली आसन को करने में किसी तरह की कोई समस्या हो रही हो तो आप इस आसन का अभ्यास ना करें! 3.मासिक धर्म के दौरान इस योग को न करें! 4.यदि आपके पीठ के निचले हिस्से में तकलीफ़ है तो रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर ही यह मुद्रा करें। 5.इसके अतिरिक्त अगर सायटिका की समस्या से परेशान है, तो आप उस आसन से दूर रहे!


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